१. हम खाना नहीं खातेअन्न ग्रहण करते हैं ।

२. हम बाजार में चीजे नहीं लेती, वस्तुएं लेते हैं ।

३. हम अपने शौहर/बेगम के साथ नहीं रहती, अपने पती/पत्नी के साथ रहते हैं ।

४. हम अपने आँखों से नहीं, अपने नेत्रों से देखते हैं ।

५. हम अपने मकान में नहीं, अपने घर में रहती हूँ ।

६. हम किसी चीज का इस्तेमाल नहीं करती, वस्तुओं का प्रयोग करती हूँ ।

७. हम आँखों से आंसू नहीं बहाती, अपने नेत्रों से अश्रू बहाते हैैं ।

८. हम अपने दिमाग का नहीं, बुद्धि का प्रयोग करते हैं ।

९. हम शुक्रिया नहीं, धन्यवाद कहते हैं ।

१०. हम लोगों को किसी बात के लिए मुबारकबात नहीं देते, शुभ कामनाएँ देते हैं और उनका अभिनन्दन करते हैैं ।

११. हम अपने पैरों पर नहीं, अपने पाँव पर खड़े होते हैैं ।

१२. हम कहीं पर अपने पैर नहीं, अपने पग रखते हैं ।

१३. हम रात के बाद सवेरे को नहीं, हम रात्री के पश्चात प्रातःकाल को उठते हैः ।

१४. हमारे यहाँ बारिश नहीं, वर्षा होती है ।

१५. हमारे यहां गाडी तेज रफ्तार से नहीं, अपितु अत्यधिक गति से चलते हैं ।

१६. हमारे यहाँ एक दुसरे से प्यार नहीं, प्रेम करते है ।

१७. हमारे दिमाग में ख़याल नहीं, हमारी बुद्धि में विचार आते है ।

१८. हम सफर नहीं करते, अपितु यातायात करते है ।

१९. हम ख्वाब नहीं, स्वप्न देखते है ।

२०. हम चाँद को नहीं, चंद्र को देखते है ।

२१. हम सूरज को नहीं, सूर्यदेव को देखते है ।

२२. हमे हवा का नहीं, पवन का झोंका आता है ।

२३. हम इंसान नहीं, मनुष्य है ।

२४. हम आसमान को नहीं, आकाश को देखते है ।

२५. आकाश में हमे बादल नहीं, मेघ दिखते है ।

२६. हम पानी नहीं पीते, बल्कि जल/नीर प्राशन करते है ।

२७. हम चीजे मुकम्मल नहीं करते, वस्तुएं बटोरते है ।

२८. हम अपना मुँह नहीं, मुख देखते है ।

२९. हमारे यहाँ किसीकी मौत नहीं, मृत्यु होती है ।

३०. हम बच्चे पैदा नहीं करते, अपितु बच्चों को जन्म देते है ।

३१. हमे रात को नींद नहीं, निद्रा आती है ।

३२. हम रात के बाद सवेरे को आँख नहीं, रात्री के पश्चात प्रातःकाल को नेत्र खोलते है ।

३३. हम बोलने के लिए लफ्ज़ इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि वार्तालाप करने के लिए शब्दों का प्रयोग करते है ।

३४. हम लोगों को मिलने का वक्त नहीं भेंट करने का समय देते है ।

३५. हम किसी पर गुस्सा नहीं, बल्कि क्रोध करते है ।

३६. हमे ख़ुशी नहीं होती, बल्कि आनंद आता है ।

३७. हमे गम नहीं, दुःख होता है ।

३८. हम खामोश नहीं, शांत रहते है ।

३९. हमारे यहाँ सन्नाटा नहीं, अपितु निःशब्द शांतता होती है।

४०. हम पढ़ाई नहीं करते, अपितु विद्यार्चन करते है ।

क्योंकि हम सनातनी हैं और उर्दू शब्दों के प्रयोग का विरोध करते है ।

क्योंकि हम सनातनी है और सनातनी होने का हमे गर्व है ।